सामूहिक विवाह और समाज

दोस्तों अभी कुछ दिनों से समाज मे सामूहिक विवाह के बारे में चर्चा परीचर्चा का दौर चालू हुआ है,
सामूहिक विवाह आज के समय मे समाज के लिये जरूरत है लेकिन अभी तक जितने भी और जहाँ भी सामूहिक विवाह हो रहे है वहाँ हमे जोड़े की एक सही संख्या नही मिल रही है,
आप सामूहिक विवाह में एक साथ 10 जोड़ो की शादी करवाओ या 25 जोड़ो की खर्च लगभग थोड़े बहुत अंतर के साथ एक जैसा ही होगा,
फ़िर भी आयोजकों को जोड़े नही मिल पा रहे?
इसका कारण देखा जाये तो अभी भी कुछ मध्यमवर्गीय व उच्च मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों की शादियां सामूहिक में करने से कतराते है कि लोग क्या कहेंगे ये तो खाते-पीते घर का है फिर भी बच्चो की शादी सामूहिक में कर रहा है,
जब तक समाज इस मानसिकता को नही छोड़ेगा तब तक सामूहिक विवाह के आयोजन हर जगह और शहरों में करने का कोई औचित्य नही है,
ऐसी मानसिकता को बदलने के लिये समाज की हर संस्थाओ के अग्रणिओ, समाज सेवको, नेताओ, आयोजको और दानदाताओ को आगे आना पड़ेगा!
जब समाज के ये बड़े लोग अपने बच्चों की शादियां सामूहिक विवाह में करवाएंगे और चाहें तो होने वाली खर्च की रकम विवाह समिति को देंगे तो समाज मे एक अच्छा संदेश भी जायेगा कि जब बड़े बड़े लोग भी अपने बच्चों की शादिया बेझिझक सामूहिक विवाह में कर रहे है तो हमे क्या परेशानी है तभी सामूहिक विवाह समारोह अपनी सही दिशा में आगे बढ़ सकेगा और समाज का हर छोटा बड़ा व्यक्ति अपने बच्चों का विवाह सामूहिक में कर गर्व की अनुभूति महसूस करेगा।

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