समाज सेवा
आओ समाज सेवा की दुकान चलाते है,
किसी अमीर को मंच पर बुलाते है,
उसका सम्मान कर साफा पहनाते है,
उसे ख़ास होने का एहसास दिलाते है,
फ़िर उससे लाख टका लेकर मूर्ख बनाते है,
अमीर से लेकर ग़रीब को देने का विश्वास दिलाते है,
ज्यादा लेकर थोड़ा बाँटने का ढोंग रचाते है,
आओ समाज सेवा की दुकान चलाते है।।
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