समाज सेवक या समाज कंटक
दोस्तो अभी कुछ सालों से हमारे समाज मे समाजसेवा करने वालो की बाढ़ आ गई है इसकी क्रोनोलॉजी आप को समझ मे आ रही है या नही मुझे नही मालूम लेकिन मुझे लगता है ये समाज सेवा ना होकर अपने अपने ईगो (ऐब) की लड़ाई मात्र बनकर रह गयी है,
कोई अपने आप को ही बड़ा समाज सेवक दिखाने की कोशिश में लगा हुआ है तो कोई समाज सेवा के नाम पर अपनी दुकानदारी चमकाने में लगा हुआ है,
समाज मे ऐसे कार्यक्रम कराये जा रहे है जिसमे समाज को फायदा हो या ना हो पर संगठन अपनी बैलेंस सीट मजबूत बनाने में लगे हुए है।
स्वयंभू समाज सेवको ने अपनी एक ऐसी टीम (गैंग) बना दी है जिनको समाज को कैसे अंधेरे में रख कर काम करवाना है बखूबी से आता है।
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