ज़ुबान कतरनें के डर के कारण चुप हो जाने से लाख गुना बेहतर है बेज़ुबान ही पैदा होना ! 

ऐसे छुपे लोग फिर कभी भी फ़िज़ा बदलने को कलम, कदम और क़सम उठा नहीं पाते हैं। 


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